हार्ट ब्लॉकेज के लिए कौन सा योग अच्छा है?HealthPlanet

Posted on Fri 9th Dec 2022 : 12:49

हार्ट ब्लॉकेज खोलने में मदद करता है है ये आसन, जीवन भर रहेंगे फिट
अगर आप फेफड़ों को मजबूत रखना चाहते हैं तो भुजंगासन जरूर करें। इससे हार्ट ब्लॉकेज कभी नहीं होगा। भुजंगासन, सूर्य नमस्कार के 12 आसनों में से आठवां है। भुजंगासन को सर्पासन, कोबरा आसन या सर्प मुद्रा भी कहा जाता है। इस मुद्रा में शरीर सांप की आकृति बनाता है। यह आसन जमीन पर लेटकर और पीठ को मोड़कर किया जाता है। जबकि सिर सांप के उठे हुए फन की मुद्रा में होता है। भुजंगासन करने की विधि, इससे होने वाले अनेक फायदे के बारे में जानकारी दे रही हैं जमशेदपुर की योग एक्सपर्ट रूमा शर्मा

योग एक्सपर्ट रूमा शर्मा कहती हैं कि भुजंगासन करने से पहले कुछ जानकारी होना जरूरी है। जैसे भुजंगासन को खाली पेट ही करना चाहिए। भोजन, आसन करने के वक्त से कम से कम चार से छह घंटे पहले किया जाना चाहिए। इससे हमारे पेट में गए भोजन को पचने के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है। पचे हुए भोजन से मिलने वाली उर्जा से आपको आसन करने में आसानी होगी। भुजंगासन सुबह में ही करना अच्छा होता है।

भुजंगासन करने की विधि

पेट के बल जमीन पर लेट जाएं, अपनी दोनों हथेलियों को जांघों के पास जमीन की तरफ करके रखें। ध्यान रखें के आपके टखने एक दूसरे को छूते रहें।
इसके बाद अपने दोनों हाथों को कंधे के बराबर लेकर आएं और दोनों हथेलियों को फर्श की तरफ करें।
अब अपने शरीर का वजर अपनी हथेलियों पर डालें, सांस भीतर खींचें और अपने सिर को उठाकर पीठ की तरफ खीचें। ध्यार दें कि इस समय आपकी कुहनी मुड़ी हुई हो।
इसके बाद आपे सिर को पीछे की तरफ खीचें और साथ ही अपनी छाती को भी आगे की तरफ निकालें। सिर को सांप के फन की तरह खींचकर रखें। लेकिन ध्यान दें कि आपके कंधे कान से दूर रहें और कंधे मजबूत बने रहें।
इसके बाद अपने हिप्स, जांघों और पैरों से फर्श की तरफ दबाव बढ़ाएं।

शरीर को इस स्थिति में करीब 15-30 सेकेंड तक रखें और सांस की गति को सामान्य बनाए रखें। ऐसा महसूस करें कि आपका पेट फर्श की तरफ दब रहा है। लगातार अभ्यास करने के बाद आप इस आसन को दो मिनट तक भी कर सकते हैं।

भुजंगासन करने के फायदे

टेंशन दूर होता है और डिप्रेशन में भी इससे फायदा मिल सकता है।
फेफड़ों और हार्ट की नसों के ब्लॉकेज खोलने में भी मदद करता है।
साइटिका और अस्थमा की बीमारी में भी राहत दिलाता है।
रीढ़ की हड्डी मजबूती और लचीलापन बढ़ता है।
पेट के निचले हिस्से के सभी अंगों को मजबूत करता है।
पाचनतंत्र, मूत्रमार्ग की समस्याओं को दूर करता है और यौन शक्ति बढ़ाता है।
वजन कम करने में मदद मिल सकता है।
फेफड़े, कंधों, सीने और पेट के निचले हिस्से में अच्छा खिंचाव मिलता है।

भुजंगासन करने में सावधानियां

भुजंगासन करने के लिए कुछ सावधानियां है। जैसे कि यदि आप हर्निया के मरीज हैं तो भुजंगासन नहीं करें। इसी तरह पीठ में चोट, कार्पल टनल सिंड्रोम, सिर दर्द, पेट के निचले हिस्से में सर्जरी हो तो नहीं करना चाहिए।

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